व्यूनाउ ग्रुप के सीईओ और संस्थापक सुखविंदर सिंह खारौर ने अन्य आरोपियों/संस्थाओं के साथ मिलकर हजारों करोड़ रुपये का ‘क्लाउड पार्टिकल घोटाला’ किया है। उन्होंने आम जनता (निवेशकों) की मेहनत की कमाई अपने निजी लाभ के लिए हड़प ली। सेल एंड लीज बैक (एसएलबी) मॉडल पर आधारित क्लाउड पार्टिकल का मूल व्यवसाय अस्तित्वहीन पाया गया। निवेशकों को धोखा देने के लिए इसे बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया था। यह भी पता चला है कि डेटा सेंटर ग्राहकों से कोई किराया नहीं लिया जाता था या बहुत कम राशि ली जाती थी। वजह, क्योंकि व्यूनाउ ग्रुप का पूरा व्यवसाय केवल एक धन-चक्रण योजना थी। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के मुताबिक, क्लाउड पार्टिकल्स की बिक्री के बदले निवेशकों से कुल मिलाकर लगभग 3700 करोड़ रुपये एकत्र किए गए थे। इसमें से लगभग 1800 करोड़ रुपये निवेशकों को किराए के रूप में लौटा दिए गए और शेष अपराध से प्राप्त धन (पीओसी) का उपयोग व्यापारिक उद्देश्यों के अलावा अन्य कामों के लिए किया गया। मेसर्स वीएमएसएल और समूह की कंपनियों द्वारा चैनल पार्टनर्स को उच्च कमीशन देने, विभिन्न विलासितापूर्ण वाहनों, सोने और हीरों की खरीद, फर्जी संस्थाओं के माध्यम से सैकड़ों करोड़ रुपये की धनराशि का हस्तांतरण और संपत्तियों में निवेश करने में इसका दुरुपयोग किया गया।प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), जालंधर क्षेत्रीय कार्यालय ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत, मेसर्स वुएनो समूह की कंपनियों से संबंधित धन शोधन जांच के सिलसिले में 30.01.2026 को 19.10 करोड़ रुपये मूल्य का अनंतिम कुर्की आदेश जारी किया है। ईडी ने गौतम बुद्ध नगर (नोएडा) पुलिस और पंजाब पुलिस द्वारा बीएनएस, 2023 के प्रावधानों के तहत दर्ज विभिन्न एफआईआर के आधार पर इस मामले की जांच शुरू की थी। ईडी के मुताबिक, जांच के दौरान पहले से जब्त/अचल संपत्तियों के अतिरिक्त, अचल संपत्तियों, सावधि जमाओं और सूचीबद्ध शेयरों के रूप में 19.10 करोड़ रुपये मूल्य की अतिरिक्त संपत्तियां बरामद की गईं। अचल संपत्तियां सुखविंदर सिंह खारौर, मेसर्स व्यूनो इंफोटेक प्राइवेट लिमिटेड, नितिन श्रीवास्तव और उनकी पत्नी रुचि श्रीवास्तव तथा व्यूनो ग्रुप के लेखाकार विजय झा के परिवार के सदस्यों की हैं, जबकि शेयर सुखविंदर सिंह खारौर और डिंपल खारौर के हैं।इससे पहले, 6 फरवरी 2025 के अनंतिम कुर्की आदेश के तहत बैंक बैलेंस, वाहनों और अचल संपत्तियों के रूप में लगभग 178.12 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्ति जब्त की गई थी। 14 अगस्त 2025 को तलाशी अभियान के दौरान 73.72 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्ति भी फ्रीज कर दी गई थी। जांच के दौरान, आरोपी सुखविंदर सिंह खरौर और डिंपल खरौर को 28 फरवरी 2025 को और आरिफ निसार को 24 फरवरी 2025 को गिरफ्तार किया गया था। फिलहाल ये आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं। इसके बाद, उनके और उनसे संबंधित संस्थाओं के खिलाफ 24 अप्रैल 2025 को पीएमएलए विशेष न्यायालय में अभियोजन शिकायत दर्ज की गई। केस की आगे की जांच जारी है।

