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जापान को पछाड़ दुनिया की चौथी सबसे बड़ी ताकत बना हिंदुस्तान, लेकिन ‘आम आदमी’ के लिए ये है बड़ा सच

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Indian Economy: भारत ने वैश्विक आर्थिक मानचित्र पर एक ऐतिहासिक मुकाम हासिल कर लिया है. केंद्रीय सरकार के साल के आख़िर में आर्थिक समीक्षा के मुताबिक भारत अब दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है. भारत ने जापान को GDP के मामले में पीछे छोड़ दिया है और अब जर्मनी को कंपीट करके दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी आर्थिक महाशक्ति बनने की ओर बढ़ रहा है.

उम्मीद की जा रही है कि अब से कुल 4 साल बाद, यानी 2030 तक भारत 7.3 ट्रिलियन डॉलर की इकॉनमी बन जाएगा. हलांकि, इस कामयाबी के जश्न में बड़ी आर्थिक महाशक्तियों के मुक़ाबले भारत में प्रति व्यक्ति आय काफ़ी कम है और विचार करने वाली है. क्योंकि, भारत बतौर राष्ट्र अमीर और ताकतवर तो बन रहा है, लेकिन आम भारतीय नागरिकों की आर्थिक स्थिति फटे चादर की तरह है. खैर, फ़िलहाल कामयाबी की बात करते हैं, फिर प्रति व्यक्ति आय का ज़िक्र करेंगे.

भारत की नई आर्थिक रैंकिंग
भारत का सकल घरेलू उत्पाद (GDP) अब लगभग US$ 4.18 ट्रिलियन है, जिससे वह जापान (US$ 4.46 ट्रिलियन) से ऊपर आ गया है और वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं में चौथा स्थान हासिल कर चुका है. इस उपलब्धि के साथ भारत केवल अमेरिका, चीन और जर्मनी से पीछे है. सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक ये बदलाव IMF (International Monetary Fund) की अनुमानित GDP आकड़ों पर आधारित हैं, जिन्हें 2025 और 2026 के लिए अपडेट किया गया है. इस आर्थिक रैंकिंग में भारतीय लोगों की मेहनत और उनकी ख़रीदने की क्षमता ने इकॉनमी को काफ़ी हद तक बूस्ट किया है. आर्थिक जानकारों के मुताबिक़ मजबूत घरेलू खपत और कड़े संरचनात्मक सुधारों के दम पर भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है.

भविष्य की दिशा
सरकार का बयान स्पष्ट करता है कि यदि वर्तमान आर्थिक प्रदर्शन जारी रहा, तो भारत 2030 तक जर्मनी को भी पीछे छोड़कर दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है. इसके लिए भारत का GDP अनुमानित रूप से 7.3 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँच सकता है. विश्लेषकों के मुताबिक, भारत की यह छलांग तेजी से बढ़ती घरेलू खपत, निर्यात नेटवर्क मजबूत होना, सर्विस सेक्टर और इंफ्रा सेक्टर में विस्तृत विकास और संरचनात्मक सुधारों के कारण संभव हो रही है.

वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही में भारत की वास्तविक GDP वृद्धि दर लगभग 8.2% रही, जो पिछले तिमाही के 7.8% और पिछले वित्त वर्ष की चौथी तिमाही के 7.4% से कहीं अधिक है. यह छह तिमाहियों में सबसे उच्च वृद्धि दिखाती है और वैश्विक व्यापार की अनिश्चितताओं के बावजूद अर्थव्यवस्था की मजबूती को दर्शाती है.

वैश्विक संस्थाओं के अनुमानों से समर्थन
विश्व बैंक भारत की वृद्धि दर को 2026 में लगभग 6.5% का अनुमान दे रहा है. मूडीज़ के अनुमानों के अनुसार भारत G20 देशों में सबसे तेज़ी से उभरती अर्थव्यवस्था बना रहेगा. IMF ने 2026 के लिए भारत के GDP को US$ 4.51 ट्रिलियन के करीब और जापान के आंकड़ों से आगे रखा है.

भारत तो अमीर, लेकिन भारतीय गरीब
हालांकि नॉमिनल GDP के मामले में भारत का विस्तार गंभीरता से गौर करने वाला है, क्योंकि GDP प्रति व्यक्ति (per capita) अभी भी कई विकसित अर्थव्यवस्थाओं से काफी कम है। उदाहरण के लिए, भारत का GDP प्रति व्यक्ति लगभग 2,694 अमेरिकी डॉलर है, जबकि जापान और जर्मनी में यह क्रमशः 32,487 अमेरिकी डॉलर और 56,103 अमेरिकी डॉलर के आसपास है.

भारत की अर्थव्यवस्था आकार में बड़ी होने के बावजूद, प्रति नागरिक आर्थिक समृद्धि के मामले में अभी लंबा सफ़र तय करना बाकी है. यही वजह है कि नीति-निर्माताओं के लिए अब अगली बड़ी चुनौती केवल GDP बढ़ाना नहीं, बल्कि समावेशी विकास (inclusive growth) सुनिश्चित करना है. ताकि, विकास के लाभ समाज के बड़े हिस्से तक पहुँच सकें. रोजगार सृजन, कौशल विकास, सामाजिक सुरक्षा, उत्पादकता में सुधार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मज़बूत बनाना इस दिशा के प्रमुख कदम माने जा रहे हैं.

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