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मणिपुर में राजस्थान के खिलाड़ियों से लूट, उग्रवादियों ने बनाया बंधक

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मणिपुर |मणिपुर में 69वीं नेशनल स्कूल चैंपियनशिप में हिस्सा लेने गई राजस्थान की स्कूली खेल टीम के साथ उग्रवादियों द्वारा लूटपाट का मामला सामने आया है। इस वारदात ने न सिर्फ खिलाड़ियों और उनके परिजनों को झकझोर दिया है, बल्कि अंतरराज्यीय खेल आयोजनों में खिलाड़ियों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना के बाद खिलाड़ियों की ओर से जारी वीडियो वायरल हुआ, जिसके आधार पर मणिपुर सरकार ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं।जानकारी के मुताबिक, राजस्थान की टीम 11 जनवरी को धौलपुर से मणिपुर के लिए रवाना हुई थी। टीम को दिल्ली से दीमापुर के लिए ट्रेन से जाना था, लेकिन ट्रेन देरी से चली और 13 जनवरी की शाम दीमापुर पहुंची। इसके बाद खिलाड़ियों को कार से दीमापुर से इंफाल ले जाया जा रहा था। इसी दौरान 13 जनवरी की रात करीब 12:30 बजे सेनापति और कांगपोक्पी जिलों के बीच एक सुनसान इलाके में उनकी गाड़ी को रास्ते में रोक लिया गया।एक खिलाड़ी के पिता के अनुसार, रास्ते में एक समुदाय से जुड़े कुछ उग्रवादी हथियारों के साथ सामने आए और गाड़ी को घेर लिया। बंदूकधारियों ने खिलाड़ियों और कोच को धमकाया और करीब दो घंटे तक उन्हें वहीं रोके रखा। इस दौरान खिलाड़ियों के पास मौजूद नकदी और कीमती सामान लूट लिया गया। गाड़ी में नाबालिग खिलाड़ी भी मौजूद थे, जिनमें कई महिला खिलाड़ी शामिल थीं। अचानक हुई इस घटना से बच्चे बुरी तरह सहम गए।हालांकि राहत की बात यह रही कि इस वारदात में किसी भी खिलाड़ी को शारीरिक नुकसान नहीं पहुंचा। टीम के कोच सोहनराम ने बताया कि सभी खिलाड़ी सुरक्षित हैं, लेकिन मानसिक रूप से बच्चे काफी डर गए थे। कोच के मुताबिक, यह पूरी घटना सुनसान इलाके में हुई, जहां तत्काल मदद मिलने की कोई संभावना नहीं थी।घटना के बाद खिलाड़ियों के परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा। परिजनों ने आरोप लगाया कि खिलाड़ियों की यात्रा और सुरक्षा को लेकर पहले से ही गंभीर लापरवाही बरती गई। उनका कहना है कि 52 खिलाड़ियों को मणिपुर जाना था, लेकिन सरकार की ओर से सिर्फ 24 खिलाड़ियों की ट्रेन टिकट करवाई गई, वो भी कंफर्म नहीं थी। मजबूरी में कई खिलाड़ियों को ट्रेन में बाथरूम के बाहर बैठकर सफर करना पड़ा। परिजनों का आरोप है कि अगर यात्रा की सही व्यवस्था और सुरक्षा इंतजाम होते, तो इस तरह की घटना से बचा जा सकता था।परिजनों ने राजस्थान के शिक्षा मंत्री से इस मामले की शिकायत करते हुए मांग की है कि खिलाड़ियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई हो। उनका कहना है कि खेल प्रतियोगिताओं में प्रदेश का प्रतिनिधित्व करने वाले बच्चों को भगवान भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता।इस बीच, सोशल मीडिया पर खिलाड़ियों द्वारा जारी वीडियो ने मामले को तूल दे दिया। वीडियो में एक खिलाड़ी ने आपबीती सुनाते हुए बताया कि किस तरह बंदूक दिखाकर उन्हें डराया गया और पैसे छीन लिए गए। हालांकि कोच सोहनराम का कहना है कि वीडियो में बयान देने वाली बच्ची उस समय टीम के साथ मौजूद नहीं थी और वह फ्लाइट से पहले ही इंफाल पहुंच चुकी थी। उन्होंने यह भी कहा कि स्थिति को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है और कोई बड़ी अव्यवस्था नहीं हुई।वीडियो सामने आने के बाद मणिपुर सरकार हरकत में आई। सरकार ने इंफाल के पुलिस अधीक्षक को मामले की जांच के आदेश दिए हैं। साथ ही सेनापति और कांगपोक्पी जिलों के अधिकारियों को भी जांच में सहयोग करने के निर्देश दिए गए हैं। जांच का मुख्य फोकस वीडियो की सत्यता, घटना के समय मौजूद परिस्थितियां और अपराध में शामिल लोगों की पहचान पर रहेगा।मणिपुर पुलिस का कहना है कि जैसे ही औपचारिक शिकायत दर्ज होगी, मामले में कानूनी कार्रवाई की जाएगी। जयपुर पुलिस कमिश्नर सचिन मित्तल ने बताया कि अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक संपर्क नहीं किया गया है, लेकिन जानकारी मिलने पर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

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