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भारत-यूरोपीय संघ के बाद अब अमेरिका के साथ बड़ी व्यापारिक डील की तैयारी

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नई दिल्ली। यूरोपीय संघ (ईयू) के साथ ऐतिहासिक व्यापार समझौते के बाद अब भारत के लिए वैश्विक आर्थिक मोर्चे से एक और बड़ी खुशखबरी आ सकती है। भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से लंबित प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर चल रही बातचीत अब अपने निर्णायक दौर में पहुंच गई है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, दोनों देशों के बीच व्यापारिक वार्ता में बहुत महत्वपूर्ण प्रगति दर्ज की गई है और दोनों पक्ष इस समझौते को अंतिम रूप देने के बेहद करीब हैं। हालांकि, भारत सरकार ने अभी तक इस पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन सकारात्मक परिणामों को लेकर उम्मीदें बढ़ गई हैं।
आधिकारिक सूत्रों ने बुधवार को संकेत दिया कि जहां एक ओर भारत ने यूरोपीय संघ के साथ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को अंतिम चरण तक पहुँचाया है, वहीं दूसरी ओर अमेरिका के साथ भी बातचीत की गति को निरंतर बनाए रखा गया। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत-यूरोपीय संघ समझौता अमेरिका के साथ व्यापारिक संबंधों का विकल्प नहीं है, क्योंकि भारतीय निर्यातकों के लिए अमेरिकी बाजार रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण बना हुआ है। सूत्रों के अनुसार, दोनों पक्षों के वार्ताकार एक ऐसे निष्कर्ष की ओर बढ़ रहे हैं जो दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं के लिए लाभकारी सिद्ध हो।
उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार वार्ता कुछ जटिल मुद्दों के कारण धीमी पड़ गई थी। अगस्त में अमेरिकी प्रशासन द्वारा कुछ भारतीय उत्पादों पर 50 प्रतिशत तक का भारी शुल्क लगाने के प्रस्ताव के बाद बातचीत में गतिरोध पैदा हो गया था। इसमें विशेष रूप से रूसी तेल की खरीद को लेकर लगाया गया 25 प्रतिशत का दंडात्मक शुल्क, आव्रजन नीति और टैरिफ से जुड़े अन्य मुद्दे शामिल थे। इन चुनौतियों के बावजूद, हालिया प्रगति दर्शाती है कि दोनों देश अपने आपसी मतभेदों को सुलझाने के प्रति गंभीर हैं। व्यापार जगत में यह धारणा भी बनी थी कि भारत ने यूरोपीय संघ के साथ डील संभवतः अमेरिका की कठोर शुल्क नीति के जवाब में की है, परंतु सूत्रों ने इस धारणा को खारिज कर दिया है। स्पष्ट किया गया है कि यूरोपीय संघ के साथ समझौता पूरी तरह से आपसी हितों और लाभ के आधार पर है। भारत का मुख्य उद्देश्य अमेरिका और यूरोप दोनों ही क्षेत्रों में अपना निर्यात बढ़ाना है, ताकि देश के भीतर विनिर्माण को गति मिले और रोजगार के नए अवसर सृजित हो सकें।
आगामी सप्ताह कूटनीतिक दृष्टिकोण से भी अत्यंत महत्वपूर्ण होने वाला है। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर के अगले सप्ताह वाशिंगटन की यात्रा पर जाने की संभावना है, जहाँ वे महत्वपूर्ण खनिजों से जुड़ी एक उच्च स्तरीय बैठक में भाग लेंगे। 4 फरवरी को होने वाली इस बैठक की मेजबानी अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो करेंगे। भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने भी पूर्व में संकेत दिए थे कि भारत को अमेरिका के नेतृत्व वाले आठ देशों के समूह पैक्स सिलिका में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया जा सकता है। राजदूत के इस आश्वासन और विदेश मंत्री की संभावित यात्रा से यह उम्मीद और बलवती हो गई है कि टैरिफ और तेल आयात जैसे विवादित मुद्दों पर जमी बर्फ जल्द ही पिघल सकती है और एक ऐतिहासिक व्यापारिक समझौता धरातल पर उतर सकता है।

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