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2030 तक 30 अरब डॉलर का लक्ष्य, चीन पर निर्भरता कम होगी..

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नई दिल्ली । भारत और ब्राजील ने शनिवार को ऐतिहासिक ट्रेड डील (Trade Deal) की है। पीएम नरेंद्र मोदी और ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला डी सिल्वा की बैठक के बाद दोनों देशों ने जरूरी मिनरल्स (Minerals) और स्टील सप्लाई चेन (Steel Supply Chain) में सहयोग के लिए समझौते (Agreement) पर हस्ताक्षर किए। इस कदम को चीन (China) की हेकड़ी को कम करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है, क्योंकि चीन दुनिया के रेयर अर्थ मिनरल्स के खनन और प्रोसेसिंग में 70 से 90 प्रतिशत तक नियंत्रण रखता है।
इस डील के तहत भारत और ब्राजील ने 2030 तक 30 अरब अमेरिकी डॉलर के वार्षिक द्विपक्षीय व्यापार का लक्ष्य तय किया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ब्राजील के साथ जरूरी मिनरल्स एग्रीमेंट से चीन पर निर्भरता कम हो सकती है और यह मजबूत सप्लाई चेन बनाने में मदद करेगा।

दोनों नेताओं की वार्ता के बाद कुल 9 समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। इनमें दुर्लभ पृथ्वी खनिजों के क्षेत्र में सहयोग और भविष्य के लिए डिजिटल साझेदारी बनाने जैसे महत्वपूर्ण समझौते शामिल हैं।

केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बताया कि ब्राजील के पास नायोबियम, लिथियम और लौह अयस्क जैसे महत्वपूर्ण खनिज संसाधन हैं, जबकि भारत के पास मजबूत तकनीक और विनिर्माण क्षमता है। इन संसाधनों और तकनीक के संयोजन से वैश्विक सप्लाई चेन को और मजबूत किया जा सकता है।

इसके अलावा, दोनों देशों ने कृषि, एयरोस्पेस, ऑटोमोबाइल और डिजिटल तकनीक के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के अवसरों पर भी चर्चा की। ब्राजील की कंपनियों को भारत में निवेश और साझेदारी के लिए आमंत्रित किया गया।

समझौतों के तहत एनएमडीसी, वेल और अडानी गंगावरम पोर्ट के बीच लगभग 500 मिलियन डॉलर की लागत से लौह अयस्क ब्लेंडिंग सुविधा स्थापित करने का करार हुआ। फार्मास्यूटिकल्स क्षेत्र में कैंसर और अन्य गंभीर बीमारियों की दवाओं के संयुक्त शोध और उत्पादन के लिए भी समझौते किए गए। एयरोस्पेस क्षेत्र में ब्राजील की एम्ब्रेयर और अडानी डिफेंस एंड एयरोस्पेस ने भारत में ई175 रीजनल जेट की असेंबली लाइन स्थापित करने का समझौता किया।

पीएम मोदी और राष्ट्रपति लूला ने वैश्विक आर्थिक व्यवस्था में विकासशील देशों के हितों की रक्षा और बौद्धिक संपदा अधिकारों में समान अवसर सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। इस डील से भारत की रणनीतिक स्थिति मजबूत होगी और चीन पर निर्भरता कम होगी, जबकि दोनों देशों के बीच व्यापार और तकनीकी सहयोग के अवसर और बढ़ेंगे।

 

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