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रूस से 3 करोड़ बैरल कच्चा तेल खरीदेगा भारत, ऊर्जा जरूरतों को मिलेगी बड़ी राहत

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नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की सप्लाई में आ रही रुकावटों के बीच भारत ने रूस से भारी मात्रा में तेल खरीदने का फैसला किया है। एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत करीब 3 करोड़ बैरल रूसी कच्चा तेल खरीदेगा। रिपोर्ट में बताया कि, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (आईओसी) और रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसी कंपनियों ने रूसी तेल के एग्रीमेंट किए हैं। हाल ही में अमेरिका ने समुद्र में फंसे रूसी तेल के शिपमेंट्स खरीदने के लिए भारत को 30 दिन (3 अप्रैल तक) की छूट देने की बात कही थी। हालांकि, इस पर भारतीय अधिकारी कह चुके हैं कि भारत तेल खरीदने के लिए किसी भी देश की इजाजत पर निर्भर नहीं है।
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हमलों के बाद स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के जरिए होने वाली तेल की सप्लाई प्रभावित हुई है। ऐसे में भारतीय रिफाइनर्स ने उन रूसी जहाजों को सुरक्षित किया है जो पहले से ही एशियाई समुद्र में मौजूद थे, लेकिन उन्हें खरीदार नहीं मिल रहे थे। ट्रेडर्स का कहना है कि इंडियन ऑयल ने करीब 1 करोड़ बैरल और रिलायंस ने भी कम से कम 1 करोड़ बैरल तेल खरीदा है। बाकी बचा हुआ तेल अन्य भारतीय रिफाइनिंग कंपनियों ने लिया है।
रास्ते में ही जहाजों ने भारत की ओर मोड़ा रुख
शिपिंग डेटा से पता चला है कि मायलो और सारा जैसे कई बड़े तेल टैंकर, जो पहले सिंगापुर की ओर जा रहे थे, उन्होंने अब भारत के बंदरगाहों की तरफ अपना रास्ता मोड़ लिया है। अमेरिकी छूट मिलने के तुरंत बाद इन जहाजों के डेस्टीनेशन बदल दिए गए। रूस ने इस बार यूराल्स, ईएसपीओ और वरान्डे जैसे ग्रेड का तेल ऑफर किया है।

सऊदी और इराक से घटाकर फिर रूस पर फोकस
पिछले कुछ महीनों में भारत ने रूस से तेल की खरीद कम कर दी थी और इसकी जगह सऊदी अरब और इराक से ज्यादा तेल लेना शुरू किया था। आंकड़ों के मुताबिक, फरवरी में रूस से आयात घटकर 10.6 लाख बैरल प्रति दिन रह गया था, जो कि 2024 के मध्य में 20 लाख बैरल प्रति दिन से ज्यादा था। अब मिडिल ईस्ट संकट की वजह से एक बार फिर भारत ने रूस की तरफ रुख किया है, ताकि देश में ऊर्जा की किल्लत न हो।

जरूरत का 70 प्रतिशत कच्चा तेल अब दूसरे रास्तों से आएगा
ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को ब्लॉक कर दिया है, जहां से दुनिया की 20 प्रतिशत तेल सप्लाई होती है। वहीं, भारत अपनी जरूरत का 50 प्रतिशत कच्चा तेल और 54 प्रतिशत एलएनजी इसी रास्ते से मंगाता है, लेकिन वर्तमान हालात को देखते हुए भारत ने अपनी रणनीति बदल ली है और इस विवादित रास्ते पर निर्भरता कम कर दी है। वहीं, भारतीय कंपनियां जल्द से जल्द अपना स्टॉक भरना चाहती हैं। भारत ने उन रास्तों से होने वाले कच्चे तेल के आयात में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है, जो होर्मुज के दायरे में नहीं आते।

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