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UP के सभी 75 जिलों में बत्ती गुल, बज रहे सायरन, 6 बजते ही छा गया अंधेरा

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नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में आज शाम 6 बजे सभी घरों की लाइटें बुझ गईं. चारों ओर अंधेरा छा गया. दरअसल, राज्य सरकार की ओर से शुक्रवार को ब्लैकआउट मॉक ड्रिल आयोजित की जा रही है. शाम को जैसे ही घड़ी की सुई 6 पर आकर अटकी तो एका-एक लाइटें बुझनी शुरू हो गईं, जिससे चारों ओर अंधेरा छा गया.

वहीं सायरन की आवाज सुनाई देने लगी. लाइट जाने के बाद लोग घरों से बाहर निकलकर छतों पर आ गए. सायरन की आवाज सुन कुछ लोग तो समझ ही नहीं पाए. 10 मिनट तक यही स्थिति बनी रही. असल में यह एक मॉक ड्रिल है, जिसका मकसद आपातकाल जैसी स्थिति से निपटने की तैयारियों को परखना है.

यूपी के कुछ जिलों से ब्लैकआउट मॉक ड्रिल की तस्वीरें और वीडियो भी सामने आए हैं. ब्लकैआउट के बाद बरेली जिले में कलेक्ट्रेट, बाजार और रिहायशी इलाकों में अंधेरा छा गया और सायरन सुनाई देने लगे. इस दौरान पुलिस-प्रशासन की सख्त निगरानी रही. कहीं भी रोशनी जलती नहीं दिखाई दी. लोगों को घरों में रहने के निर्देश दिए गए. प्रशासन ने मोबाइल फ्लैश, टॉर्च और धूम्रपान पर पूरी तरह रोक लगा रखी थी. चौराहों पर ट्रैफिक एकदम बंद दिखा. सिर्फ पुलिस ही पुलिस दिखाई दे रही थी. सिविल डिफेंस और आपात सेवाएं अलर्ट मोड पर रहीं.

वहीं फायर ब्रिगेड टीम ने भी कई जगहों पर आग लगाकर मॉक ड्रिल की, ताकि अगर भविष्य में इस तरह की संकट की घड़ी आ जाए, तो उससे कैसे निपटा जाए और फटाफट आग कैसे बुझाई जाए, इसकी मॉक ड्रिल की गई. इस दौरान फायर ब्रिगेड की कई गाड़ियां और स्टाफ मौजूद रहा. बरेली के कई इलाकों में फायर टीम ने इस तरह की मॉक ड्रिल की.

अंबेडकरनगर और फिरोजाबाद की गई मॉक ड्रिल
वहीं अंबेडकरनगर और फिरोजाबाद जिले में ब्लैकआउट मॉक ड्रिल का अभ्यास किया गया. यह अभ्यास शाम 6 बजे से 6 बजकर 10 मिनट तक चला, जिसमें जिले के कई इलाकों में लाइटें बंद रखी गईं. फिरोजाबाद जिले के पीडी जैन इंटर कॉलेज के खेल मैदान एवं आसपास के क्षेत्र में ब्लैकआउट एक्सरसाइज और राहत-बचाव से जुड़ी मॉक ड्रिल भी की गई, ताकि किसी भी संभावित हवाई हमले या आपदा की स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित की जा सके.

लखनऊ में CM योगी ने देखी ब्लैकआउट मॉक ड्रिल
वहीं राजधानी लखनऊ में शाम 6:00 बजे 10 मिनट के लिए ब्लैकआउट यानी बिजली सप्लाई को बंद कर दिया गया. पुलिस लाइन में आयोजित मार्क ड्रिल के मौके पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद भी मौजूद रहे. अभ्यास कर रही टीमों ने अलर्ट का सायरन बजाते हुए सबको लेट जाने का संकेत दिया. संकेत मिलते ही सब लेट गए. मौके पर स्वास्थ्य विभाग की टीम एंबुलेंस के साथ मौजूद री. वहीं SDRF और NDRF की भी टीमें मौजद रहीं.

ब्लैकआउट मॉक ड्रिल क्या है?
ब्लैकआउट एक ऐसी स्थिति है, जब किसी क्षेत्र में बिजली की आपूर्ति पूरी तरह से बंद हो जाती है, जिससे लोगों को अंधेरे में रहना पड़ता है. यह तकनीकी खराबी, प्राकृतिक आपदा, या अन्य कारणों से हो सकता है. साथ ही दुश्मन के हवाई हमले या ड्रोन हमले से सुरक्षा के लिए रात में शहर/इलाके की पहचान छिपाने के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा एवं नागरिकों की जान-माल की रक्षा के लिए आपदा या युद्ध जैसी परिस्थितियों में रणनीतिक सावधानी बरतने के लिए ब्लैकआउट किया जाता है.

विशेषज्ञों के अनुसार, इतिहास इस बात का साक्षी रहा है कि युद्धकाल में ब्लैकआउट ने लाखों लोगों की जान बचाई है. द्वितीय विश्व युद्ध के समय कई देशों में नियमित रूप से ब्लैकआउट किया जाता था, जिससे दुश्मन की हवाई निगरानी को भ्रमित किया जा सके. आज के दौर में भले ही प्रत्यक्ष युद्ध की संभावना कम हो, लेकिन आपदा प्रबंधन और सुरक्षा अभ्यास के लिहाज से ऐसे ब्लैकआउट बेहद जरूरी माने जा रहे हैं. इससे प्रशासन के साथ-साथ आम जनता की तैयारियों का भी वास्तविक आकलन हो पाता है.

 

 

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